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फिर आज दिल क्यूँ रोया ?

Posted On: 17 Oct, 2011 Others,मेट्रो लाइफ में

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heart-tattoo-38[1]फिर आज दिल क्यों रोया ….?
उन लम्हों को ,उन यादों को ..
सीने से भींच कर क्यों लगाया ?
बंद मुट्ठी से फिसले रेत को
बूँद -२ आंसुवों से क्यों भिगोया ?
फिर आज दिल क्यूँ रोया ?

 

किससे पूंछु ?क्या कहूँ किसको ?
क्यों कर मैंने तुमको भुलाया ?
जो दिया था जख्म तूने मुझको ,
बस वही सौगात तो है लौटाया .
फिर आज दिल क्यूँ रोया ?

 

कोई तो ये पैगाम दे दो उनको ,
जिन्होंने दोस्त बन दुश्मनी निभाया ,
दुश्मनों की यूँ भी क्या कमी थी दोस्त ,
कि तुम्हें भी इसी कतार में पाया ,
फिर आज दिल क्यूँ रोया ?

 

ताक रही हूँ सुबह से उस शून्य को ,
जिसे जमीं ने बिछकर आसमां बनाया
निगोड़े उसी ने कभी ,बिजली गिराई,
कभी सैलाब में सब कुछ डुबोया ,
फिर आज दिल क्यूँ रोया ..?
फिर आज दिल क्यूँ रोया ?

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43 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sukanyathakur के द्वारा
November 3, 2011

bohot acha hai maa…:) kasam se tum duniya ki best mumma ho…:) and best writer bhi..:)

    sadhana thakur के द्वारा
    December 13, 2011

    बेटा ,तुम दुनिया की सबसे अच्छी बेटी हो……….धन्यवाद्,,,,,,,

pramod chaubey के द्वारा
October 19, 2011

जो दिया था जख्म तूने मुझको , बस वही सौगात तो है लौटाया . फिर आज दिल क्यूँ रोया ? आपकी रचना में दम है। जो दिया था जख्म तूने मुझको, बस उसी जख्म को हमने ढोया…फिर आज दिल क्यूँ रोया ? आपकी रचना में मैनें मनमानी कर दी.. माफ करेंगे। 

    sadhana thakur के द्वारा
    October 19, 2011

    प्रमोद जी ,प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ,,,,,,,,,,,,

Lahar के द्वारा
October 19, 2011

साधना जी सप्रेम नमस्कार एक फिर आपने सुन्दर शब्दों के साथ सुन्दर रचना प्रस्तुत की | ताक रही हूँ सुबह से उस शून्य को , जिसे जमीं ने बिछकर आसमां बनाया निगोड़े उसी ने कभी ,बिजली गिराई, कभी सैलाब में सब कुछ डुबोया , ये पंक्तिया बहुत अच्छी लगी | धन्यवाद |

    sadhana thakur के द्वारा
    October 19, 2011

    लहर भाई ,,बहुत दिन बाद आप दिखे ,,सब कुशल मंगल है न ? आपको रचना अच्छी लगी इसके लिए आभार आपका .

राही अंजान के द्वारा
October 18, 2011

बंद मुट्ठी से फिसले रेत को बूँद -२ आंसुवों से क्यों भिगोया ? . सुंदर पंक्तियाँ साधना जी ! आभार आपका !! :)

    sadhana thakur के द्वारा
    October 19, 2011

    राही जी ,दिल से आभार आपका की आपको मेरी रचना की चाँद पंक्तियाँ पसंद आई ,,सहयोग के लिए धन्यवाद् …….

Rajkamal Sharma के द्वारा
October 18, 2011

आदरणीय साधना बहिन जी ….. सादर अभिवादन ! आप इसी प्रकार हमारी आदरणीय अलका जी को याद करती रहा करे और हमारी सेवा में इसी प्रकार कि दिल से रचनाये प्रस्तुत करती रहे , हा हा हा हा आपकी कल वाली समस्या के बारे में मैंने अपने ब्लॉग पर बताया है …. लेकिन आज यहाँ पर एक बात और कहना चाहूँगा कि अगर उस समय तक आपका ब्लॉग फीचर्ड नहीं हुआ है तो आप उस रचना को डिलीट करके दुबारा से पोस्ट कर सकती है तथा खुद अपने द्वारा ही एक कमेन्ट टेस्टिंग का लिख कर जांच कर सकती है ….. मुबारकबाद सहित आपको सपरिवार दीपावली कि हार्दिक शुभकामनाये http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/10/17/“खुदा-का-खत”/ :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    सम्मानीय राजकमल भाई ,बहुत-२ धन्यवाद् की आपने पुनः अपनी प्रतिक्रिया दी ,हा आगे से मैं रचना पोस्ट करते वक़्त ध्यान रखूंगी ..आभार ………………..

Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
October 18, 2011

आदरणीय साधना बहन जी, सादर प्रणाम ! ह्रदय के भावों की बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ……….बहुत बहुत बधाई !

    sadhana thakur के द्वारा
    October 19, 2011

    आभार आपका पुनः एक बार ……कैलाश जी …….

syeds के द्वारा
October 18, 2011

बहुत ही सुन्दर रचना के लिए बधाई.. http://syeds.jagranjunction.com

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    syeds ji ,हार्दिक आभार आपका ,रचना की सराहना के लिए ……

priyasingh के द्वारा
October 18, 2011

यादे ऐसी ही होती है कभी तो हंसा देती है और कभी मन को आहात करके रुला देती है ……………..बहुत अच्छा लिखा है आपने इतने दिन इस मंच से दूर रही पर आज आप सबको पड़ने के बाद लग रहा है इतने दिन बहुत कुछ खोया………..

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    प्रिया जी ,मंच पर पुनः आपका स्वागत है ,आभार आपका आपकी प्रतिक्रिया के लिए ..

abodhbaalak के द्वारा
October 18, 2011

साधना जी बहुत ही खूबसूरत रचना, दिल को जो छू ले वही रचना ………… और ये आपकी उन रचनाओं के श्रेरने में से है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    अबोध भाई ,आपको रचना पसंद आई यानि मेरा लिखना सार्थक रहा ,प्रतिक्रिया हेतु आभार ,आपका सहयोग हमेशा बस बना रहे …….धन्यवाद् ….

vinitashukla के द्वारा
October 18, 2011

सुन्दर और भावपूर्ण रचना साधना जी. बधाई.

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    विनीता जी ,बहुत -२ धन्यवाद् ,सहयोग बनाये रखें …….

Amita Srivastava के द्वारा
October 18, 2011

साधना जी , जो कभी मिलने को बेसब्र रहा करते थे , वही अब दूर रहने के बहाने ढूढ़ते है | दोस्ती पर अच्छी कविता …

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    अमिता जी ,यूँ तो दिल कई बार टूटता है ,पर जब कोई दोस्त दिल तोड़े तो दर्द की इन्तहा होती है , आभार आपका आपकी प्रतिक्रिया के लिए ……..

mparveen के द्वारा
October 18, 2011

साधना जी , बहुर सुंदर रचना …. बधाई हो !!!!!

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    mparveen ji ,thanku so much ………….

alkargupta1 के द्वारा
October 18, 2011

प्रिय साधना , कल कई बार प्रतिक्रिया देने का प्रयत्न किया लेकिन हर बार कमेन्ट क्लोस का ऑप्शन आ रहा थाआज जब तुम्हारी पोस्ट पर कमेन्ट देखे तो में लिख रही हूँ……. तुम्हारा यह पैगाम अवश्य ही इन भावनाओं द्वारा उन तक पहुंचेगा जिन्होने दोस्ती के बाद दुश्मनी को निभाया…….बहुत बी बढ़िया भावाभिव्यक्ति !

    alkargupta1 के द्वारा
    October 18, 2011

    बहुत बी को ‘ही’ पढना

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    भाभी जी ,प्रणाम ..कल कुछ ऐसा हुआ की दिल भर आया ,,कल बहुत शिद्दत से मैंने आपको याद किया ,और फिर जब दिल भर आया तब मैंने ये रचना लिखी ..आपको पसंद आई इसके लिए धन्यवाद् ……..

Rajesh Dubey के द्वारा
October 18, 2011

साधना जी “लोग पत्थर भी मारें कोई बात नहीं, तुम्हारे फूल का जख्म गहरा होगा”.दोस्तों की दुश्मनी बहुत चोट पहुचती है. बहुत बढियां रचना. बधाई

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    राजेश भाई ,सच कहा आपने जिसे दिल से चाहो उसकी दी ठोकर से सिर्फ चोट ही नहीं लगती बल्कि दिल लहूलुहान हो जाता है ….तहे दिल से शुक्रिया रचना को सराहने के लिए ……..

Santosh Kumar के द्वारा
October 18, 2011

आदरणीय साधना जी , बहुत ही भावपूर्ण सुन्दर अभिव्यक्ति ,..हार्दिक साधुवाद

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    सम्मानीय संतोष भाई ,हार्दिक आभार आपका ,हमेशा की तरह सहयोग के लिए धन्यवाद …….

akraktale के द्वारा
October 18, 2011

साधना जी सादर नमस्कार, बहुत ही मार्मिक पंक्तियों से आपने बेवफाई को बयान किया है. कोई तो ये पैगाम दे दो उनको , जिन्होंने दोस्त बन दुश्मनी निभाया , दुश्मनों की यूँ भी क्या कमी थी दोस्त , कि तुम्हें भी इसी कतार में पाया , फिर आज दिल क्यूँ रोया ? बधाई!

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    sir akraktale ji ,दुनिया में दो ही लोग सबसे ज्यादा याद आतें है ,दोस्त और दुश्मन ,और जब दोस्त ही दुश्मन बन जाये तो सोचिये उन यादों का क्या होगा …….

    jlsingh के द्वारा
    October 19, 2011

    साधना जी सादर नमस्कार, मुझे भी यही पंक्तियाँ रास आयी थी और मैं टिप्पणी देना चाह था पर, तब शायद कुछ तकनीकी समस्या थी. खैर बहुत ही अंतर्मन से लिखा है और खूबसूरती प्रदान की है. बधाई!- जवाहर.

    sadhana thakur के द्वारा
    October 19, 2011

    jlsingh ji ,,,,रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार ,,हा ये सच है की अपनों की पहचान बड़ी मुश्किल से होती है ……

nishamittal के द्वारा
October 18, 2011

ताक रही हूँ सुबह से उस शून्य को , जिसे जमीं ने बिछकर आसमां बनाया निगोड़े उसी ने कभी ,बिजली गिराई, कभी सैलाब में सब कुछ डुबोया , फिर आज दिल क्यूँ रोया ..? फिर आज दिल क्यूँ रोया ? बहुत सुन्दर भाव प्रधान रचना साधना जी मुझको अंतिम पंक्तियाँ अधिक सार पूर्ण लगीं.

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    आदरणीय निशा जी ,आपको मेरी रचना की अंतिम पंक्ति बहुत अच्छी लगी इसके लिए आभार आपका हा ये सच है की ये भाव मेरे अंतर्मन से निकले हैं ,आपका बहुत -२ धन्यवाद् .

krishnashri के द्वारा
October 18, 2011

महोदया, तड़प में दर्द और दर्द पर तड़प दोनों को बखूबी दर्शाती पंक्तियाँ ,मेरी शुभ कामना /

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    sir,krishnashri ji,,नमस्कार .हा ये मेरे दिल का दर्द ही है जी लफ्जों में बयां हुआ है .बहुत-२ धन्यवाद् रचना की सराहन और प्रतिक्रिया के लिए ….

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 18, 2011

अति सुन्दर साधना जी। भावनाओं की अभिव्यक्ति में कहीं से भी कोई कमी कोई भी नहीं निकाल सकता पर शब्दों के चुनाव के बारे में यह कहना मुश्किल है। आपका आभार,

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    वाहिद भाई ,जब दिल बहुत ही तन्हा हो ,और तड़प की इन्तहां हो जाये तो रचना में वो भाव आ ही जाते हैं ,पर मैं मानती हूँ की लफ्जों में कमी रह गई होगी …..भाई मैं कोई बड़ी लेखक या कवियत्री नहीं हूँ बस दिल के भाव को व्यक्त करने को जब मन मचलता है तो कुछ लिख डालती हूँ वैसे आप लोगों के विचार से बहुत कुछ सीखने का मौका मिल रहा है और वादा है आगे भी सुधार करती रहूंगी …..

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    राजकमल भाई कल आपने मेरी इस रचना को पढ़ कर मेरी दूसरी रचना पर प्रतिक्रिया भेजी थी ..आपका तहे दिल से शुक्रिया की आपने मेरी रचना को मान दिया ..बहुत -२ धन्यवाद् आपका …..

    sadhana thakur के द्वारा
    October 18, 2011

    कैलाश भाई कल आपकी प्रतिक्रिया मिली थी ,आभार आपका ,आज से मेरी इस रचना पर प्रतिक्रिया पोस्ट हो रहा है ………


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