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♥ ♥ ♥ जी चाहता है ♥ ♥ ♥

Posted On: 30 Oct, 2011 Others में

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एहसास ए दिल ,शिद्दत से जागा है ,

 आज फिर से जीने को जी चाहता है.


 

समंदर की लहरों पर ,कदम दो कदम .
चलने को जी चाहता है.

 

उड़ते बादलों के धुंध में ,पल दो पल
खो जाने को जी चाहता है.

 

आसमा के चौड़े सीने में ,सर छुपाकर
सो जाने को जी चाहता है.

 

सागर की नीली बाँहों में समाकर ,होश
खो देने को जी चाहता है.

 

फिजां की इन रंगीन वादियों में ,एक बार
गुम हो जाने को जी चाहता है.

 

आज दिल के आशियाने में शमा जलाकार
पैगामें मोहब्बत ,देने को जी चाहता है.

 

बहुत काट ली ज़िन्दगी यूँ ही दोस्तों ,अब
कुछ कर गुजरने को जी चाहता है.

 

बहुत कर ली इबादत ,दर बदर ,इधर उधर
अब रुक जाने को,जी चाहता है.

 

कहते है खुदाया इधर भी है ,उधर भी ,आज
खुद में उसे ढूँढने को ,जी चाहता है.

 

बहुत हसीं गुनाह है ये यारो इश्क.बार बार
करने को जी चाहता है.

 

ज़िन्दगी वही जो औरों के काम आये ,आज
फिर जीने को जी चाहता है.

 

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51 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kiranarya के द्वारा
December 20, 2011

जी के हालात कुछ न्यारे है, कभी यह तो कभी वो चाहता है, नित नए नामो से इसे नवाज़ा जाता है, कभी पागल कभी आवारा कहलाता है, लेकिन फिर भी हर पल कुछ नया, कर गुजरने को जी चाहता है……..किरण आर्य

    sadhana thakur के द्वारा
    December 20, 2011

    सही कहा आपने ,इसलिए तो कहते हैं ,दिल तो पागल है ………..आभार आपका …………

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 12, 2011

ज़िन्दगी वही जो औरों के काम आये , आज फिर जीने को जी चाहता है. सुंदर प्रस्तुति…..

    sadhana thakur के द्वारा
    December 6, 2011

    बहुत -बहुत धन्यवाद् पन्त जी ,,आभार आपका …………

sukanyathakur के द्वारा
November 3, 2011

waah..waahh…ishq karne ki umar khatam nahi hui tumhari..???? meri mummaa…bohot acha likha hai..:) :)

    sadhana thakur के द्वारा
    November 13, 2011

    thanksे  beta  :)

Rajkamal Sharma के द्वारा
November 3, 2011

आदरणीय साधना बहिन जी …..सादर अभिवादन ! ठीक है हर बार तो संभव ही करने का दिल करता है …… लेकिन आपने इस बार असंभव को संभव करने का मन बना लिया है तो भगवान से यही प्रार्थना है की आपकी म्नोकामनाए और अभिलाषाए पूरी हो …. मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    sadhana thakur के द्वारा
    December 6, 2011

    सम्मानीय राजकमल भाई ,बहुत देर से आपकी प्रतिक्रिया पर आभार दे रही हूँ मांफ करेंगे ..मंच से दूर थी ..धन्यवाद् आपका ..

shuklabhramar55 के द्वारा
November 2, 2011

साधना जी अभिवादन ..प्यारी रचना ..सुन्दर मूल भाव ..गजब की लय..आनंद दाई …सच में जी चाहता है कभी कभी ये सब खुशनुमा मंजर आ जाए ….निम्न पंक्तियाँ बेहद सुन्दर शुक्ल भ्रमर ५ आज दिल के आशियाने में शमा जलाकार पैगामें मोहब्बत ,देने को जी चाहता है. ज़िन्दगी वही जो औरों के काम आये ,आज फिर जीने को जी चाहता है.

    sadhana thakur के द्वारा
    November 3, 2011

    भ्रमर जी ,,आपके सुन्दर प्रतिक्रिया का हमेशा इंतजार रहता है ,,बहुत ही ख़ुशी हुई ये जान कर की आपको रचना पसंद आई ,दिल से आभार …..

munish के द्वारा
November 1, 2011

आदरणीय साधना जी, अंतिम पंक्तियाँ तो बहुत ही सुन्दर हैं………. ऐसा नहीं है की मैं आपका ब्लॉग नहीं पढता, पर पढ़कर ज्यादातर like कर देता हूँ या स्टार देता हूँ तो आज के फाईव स्टार……… :)

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    सम्मानीय मुनीश भाई ,बहुत -बहुत आभार आपका ,की आपने प्रतिक्रिया दी ,आपके दो शब्द विचार मिलने से काफी हौसला मिलता है ,धन्यवाद् आपका ,

राही अंजान के द्वारा
November 1, 2011

ज़िन्दगी वही जो औरों के काम आये ,आज फिर जीने को जी चाहता है !! खूबसूरत अल्फ़ाज़ साधना जी…..हार्दिक बधाई ! :)

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    संदीप जी ,,तहे दिल से शुक्रिया ,आप सब के विचार से बहुत सहयोग मिलता है …..

mparveen के द्वारा
November 1, 2011

साधना जी नमस्कार, आपकी रचना के अहसास में डूबने को जी चाहता है ….. बार बार पढने को जी चाहता है…. बहुत कर ली इबादत ,दर बदर ,इधर उधर अब रुक जाने को,जी चाहता है……… गले लग के बधाई देने को जी चाहता है पर अभी कमेन्ट से ही सविकार कर लीजिये ….

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    mparveen ji ,बहुत अच्छा लगा आपका विचार ,बेहद ख़ुशी हुई ,धन्यवाद्……

sumandubey के द्वारा
October 31, 2011

साधना जी नमस्कार , सुंदर जिन्दगी व्ही जो औरो —————जीने को जी चाहता है.

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    सुमन जी .बहुत-बहुत धन्यवाद आपका ,आपकी प्रतिक्रिया के लिए …….

vinitashukla के द्वारा
October 31, 2011

सुन्दर जज्बातों का खुबसूरत इज़हार! बधाई साधना जी.

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    विनीता जी ,,बहुत -बहुत आभार आपका ,आपको गजल अच्छी लगी ,,धन्यवाद् …

Amita Srivastava के द्वारा
October 31, 2011

साधना जी भाव गहरे है …खुदा इधर ………………..खुद मे ढूढने को जी चाहता है | अच्छी लगी ये पन्तिक्याँ | मुबारकवाद

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    अमिता जी ,आपको गजल में छिपे भाव अच्छे लगे इसके लिए शुक्रिया आपका ,आप सब का सहयोग पाकर अच्छा लगता है ,धन्यवाद्…..

manoranjanthakur के द्वारा
October 31, 2011

फिर से वही दौर में फ़ना हो जाने को जी करता है बहुत बधाई

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    मनोरंजन भाई .ख़ुशी हुई की आप गजल पढ़ कर खूबसूरत यादों में खो गए ,,प्रतिक्रिया के लिए आभार ………….

वाहिद काशीवासी के द्वारा
October 31, 2011

ज़िंदगी वही जो औरों के काम आये, आज फिर जीने को जी चाहता है. ये पंक्तियाँ मुझे बहुत पसंद आयीं साधना जी। आपने काफ़ी हद तक ग़ज़ल के मिज़ाज को पकड़ लिया है। आप साहित्य के और भी उच्च शिखर पर विराजमान हों इस कामना के साथ,

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    वाहिद भाई ,,सबसे पहले शुक्रिया आपका ,हमेशा मार्गदर्शन के लिए ,,अगर आपको गजल थोड़ी सी भी पसंद आई तो मुझे बेहद ख़ुशी हुई ,,हमेशा आपसे सहयोग की उम्मीद रहेगी ,,,आभार आपका …

minujha के द्वारा
October 31, 2011

बेहद खुबसूरत शब्दों की लङी,जिसकी हर पंक्ति मन की उङान को और हवा दिए जाती है और अंत आते आते उस ऊंचाई को छू लेती है जहां बस ठहर जाने को जी चाहता है.बहुत अच्छी रचना.

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    मीनू ,बहुत -बहुत धन्यवाद् ,,तुम्हें मंच पर प्रतिक्रिया देते देख ख़ुशी हुई ..

alkargupta1 के द्वारा
October 31, 2011

प्रिय साधना , उत्कृष्ट कृति ! आज ज़िन्दगी की अंधी दौड़ में हर कोई अपने लिए ही जीना चाहता है…….लेकिन जीवन की सार्थकता उसी में ही है यदि हम दूसरों के लिए थोडा बहुत कुछ भी करें…..असीमानंद की प्राप्ति……और फिर जीने की चाह बलबती……! अति उत्तम रचना के लिए बधाई !

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    भाभी जी ,प्रणाम,आपका प्यार और सहयोग पाकर ही आज यहाँ तक पहुंची हूँ ,,आपका दिल से आभार .आपको रचना लगी ,मेरे लिए सबसे ख़ुशी की बात है ………….

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    आपको रचना अच्छी लगी ,धन्यवाद्

abodhbaalak के द्वारा
October 31, 2011

साधना जी “आपकी रचनाएँ इतनी सुन्दर होती हैं के जितना भी पढ़े और पढने को जी चाहता है ” :) सुन्दर रचना ……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    अबोध जी ,,आपका हमेशा बहुत सहयोग मिला है ,मैं बेहद शुक्रगुजार हूँ आपका ,,तहे दिल से आपका शुक्रिया ..

anamika के द्वारा
October 31, 2011

अओकी एक और कविता पढने को जी चाहता hai

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    अनामिका जी ,,बहुत-बहुत धन्यवाद् ,जल्द ही आपकी ख्वाहिश पूरी करूंगी ,धन्यवाद..

akraktale के द्वारा
October 31, 2011

साधना जी नमस्कार, सुन्दर रचना. बधाई. इश्क गुनाह,इबादत समंदर से जब दिल बहल जाए तो बार बार इसको करने को जी चाहता है.

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    धन्यवाद सर ,,आपको गजल अच्छी लगी ,आभार आपका …

nishamittal के द्वारा
October 31, 2011

साधना जी रचना आपकी बहुत सुन्दर है मुझको अंतिम पंक्तियों ने बहुत प्रभावित किया” ज़िन्दगी वही जो औरों के काम आये ,आज फिर जीने को जी चाहता है.”

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    आदरणीय निशा जी ,,बहुत ख़ुशी हुई की आपको मेरी रचना अच्छी लगी ,दिल से आभार आपका ,आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए बहुत -बहुत धन्यवाद्,,,,,,,

Rajesh Dubey के द्वारा
October 31, 2011

ज़िन्दगी वही जो औरों के काम आये ,आज फिर जीने को जी चाहता है. बहुत बढ़िया शेर. साधना जी वाकई तारीफ की हक़दार है,आप. बहुत सुन्दर रचना.

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    राजेश जी ,बहुत -बहुत आभार आपका ,आपकी प्रतिक्रिया के लिए ..

RaJ के द्वारा
October 30, 2011

सुन्दर भावनाओं से ओत प्रोत कविता के लिए बधाई

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    राज जी .तहे दिल से शुक्रिया ,,

shashibhushan1959 के द्वारा
October 30, 2011

पूरी नहीं कामना होती है कभी नर की, फिर  भी  उसे जीने को  जी चाहता है,  खूबसूरत रचना है, मन को लुभाती है, धन्यवाद   देने  को  जी  चाहता  है  ।

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    शशिभूषण जी ,,बहुत अच्छी लगी आपकी प्रतिक्रिया ,,,धन्यवाद ………..

Santosh Kumar के द्वारा
October 30, 2011

आदरणीय साधना जी ,.रचना बहुत अच्छी लगी ,.बधाई स्वीकार करें

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    संतोष भाई ,बेहद ख़ुशी हुई ये जानकर की आपको रचना पसंद आई ..आभार आपका ………..

Lahar के द्वारा
October 30, 2011

प्रिय साधना जी सप्रेम नमस्कार एक बार फिर आपने एक उत्कृष्ट लेखन का नमूना पेश किया | बहुत कर लिया सजदा तेरी खातिर लहर ! अब तो इश्क – ए – फ़ना होने को जी चाहता है |

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    लहर जी ,तहे दिल से शुक्रिया ,,आभार आपका आपकी अच्छी प्रतिक्रिया और अच्छे शेर के लिए ……….

naturecure के द्वारा
October 30, 2011

आदरणीय दीदी जी सादर प्रणाम ! बहुत सुन्दर रचना ……………….बधाई ! ज़िन्दगी वही जो औरों के काम आये ,आज फिर जीने को जी चाहता है.

    sadhana thakur के द्वारा
    November 1, 2011

    कैलाश भाई ,दिल से आभार आपका .आपकी प्रतिक्रिया और सहयोग के लिए ……..


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