Mujhe bhi kuch kehna hai

Mann ki aawaz

19 Posts

776 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 6020 postid : 229

ज़िन्दगी तुझे जी कहाँ पाई ...!!!

Posted On: 7 Jan, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

symon

रात भर जागती रही ,
बिसुरती ,कराहती रही ,
दीये को जलाती-बुझाती रही ,
अँधेरे से उजाला मांगती रही ,
लो ,सुबह तो हो गई ,,,,,,,,,,,
पर अब क्या करूँ……….?
कहाँ जाऊं …?

दिन के धूप में सब दिखता है ,
आँखों की नमीं ,उसमे छिपा दर्द ,
चेहरे पर छाई उदासी की लकीरें ,
बेमकसद की ज़िन्दगी ,
होठों की फीकीं हंसी ,
उजाले में सब चमकता है ,
मन फिर अँधेरा कोना ढूँढता है ,
तो फिर क्या करूँ ………..?
फिर से , रात का इंतज़ार ……….?

कब से भटकती रही हूँ
आहें , भर भर सिसकती रही हूँ ,
ज़िन्दगी तुझे ढूंढते ढूंढते थक सी गयी हूँ
कहने को तो उम्र कटने को है आई ,
पर ज़िन्दगी तुझे जी कहाँ पाई ….???
ज़िन्दगी तुझे जी कहाँ पाई ….?????

या रब भटकती रही तुझे पाने को दरबदर इधर उधर ,
भूख से बिलखती , उघडी जिस्म नज़र क्यूँ न आई …..
ज़िन्दगी तुझे जी क्यूँ न पाई ….?????

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 4.38 out of 5)
Loading ... Loading ...

60 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

panditsameerkhan के द्वारा
March 22, 2012

साधना जी बहुत सुन्दर कविता है आपकी और सही है की जिंदगी गुज़ारना और बात है और जिंदगी को जी पाना दूसरी बात है ….बहुत खूब..

    sadhana thakur के द्वारा
    March 22, 2012

    बहुत-बहुत धन्यवाद् आपका ,कविता की सराहना के लिए ……..

January 20, 2012

कहते हैं, की दर्द जब हद से गुज़र जाता है, तो दवा बन जाता है. मैंने देखा भी है, की जब आँखें भर-भर कर थक गयी होती हैं,तो मुस्कान आसान कर देती है ग़मों को हवा में उडेलना. हर एक बार ज़िन्दगी जी पाना आसान न भी हो, मजबूरी तो होती ही है. क्यों न मजबूरी का स्वागत मुस्कान से करने का ही प्रयास किया जाए..! जीवन का पक्ष किसी के लिए श्याम न हो, सबके लिए मंगलकामनाएं, शुभकामनाएं.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 21, 2012

    आभार तिम्सी जी ,प्रतिक्रिया हेतु …………

dineshaastik के द्वारा
January 20, 2012

कृपया इसे भी पढ़े– आयुर्वेदिक दिनेश के दोहे भाग-2 http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    sadhana thakur के द्वारा
    January 21, 2012

    दिनेश जी ,मैंने आपके दोहे पढ़े और लाभ भी उठाने की कोशिस करूंगी ………

D33P के द्वारा
January 16, 2012

अँधेरे से उजाला मांगती रही , लो ,सुबह तो हो गई ,,,,,,,,,,, पर अब क्या करूँ… भावपूर्ण रचना. दिल को छु लेने वाली पंक्तिया बधाई साधना जी.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 17, 2012

    बहुत -बहुत आभार आपका रचना को सराहने के लिए ……….

minujha के द्वारा
January 14, 2012

मुझे आपको ये बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि आपकी इस रचना का अंश कल के दैनिक जागरण में आया है,मुझे आज सुबह मम्मी ने बताया और कहा -कि मेरी ओर से भी साधना को ढेर सारी बधाईयां और शुभकामना देना,आप भी दैनिक जागरण के e-paper पर जाकर पटना संस्करण डालकर देख सकतीं है,

    sadhana thakur के द्वारा
    January 15, 2012

    थैंक्स मीनू .मुझे भी कल पता चला ,मैंने नेट पर देखा ,दीदी को मेरा प्रणाम कहना ………..

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
January 12, 2012

बहुत सुन्दर कविता,बधाई ! साधना जी. …..राजीव

    sadhana thakur के द्वारा
    January 12, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद् राजीव जी …

vinitashukla के द्वारा
January 12, 2012

पीड़ा को सजीव करती हुई सुन्दर और भावपूर्ण रचना. बधाई साधना जी.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 12, 2012

    विनीता जी ,बहुत दिन बाद आपकी प्रतिक्रिया पाकर बहुत ख़ुशी हुई ,बहुत -बहुत धन्यवाद् की आपको रचना पसंद आई …………

suhana के द्वारा
January 11, 2012

बहुत अच्छी रचना साधनाजी ,,भावनाओ से भरी कविता …….

    sadhana thakur के द्वारा
    January 11, 2012

    thanks suhana ji …………

roshni के द्वारा
January 10, 2012

साधना जी नमस्कार, कहने को तो उम्र कटने को है आई , पर ज़िन्दगी तुझे जी कहाँ पाई ….??? ज़िन्दगी तुझे जी कहाँ पाई ….??? बहुत सुंदर रचना ….

    sadhana thakur के द्वारा
    January 10, 2012

    रौशनी जी ,आभार आपका की आपको मेरी कविता पसंद आई ,तहे दिल से शुक्रिया ……….

mparveen के द्वारा
January 10, 2012

साधना जी नमस्कार, बहुत सुंदर रचना ….

    sadhana thakur के द्वारा
    January 10, 2012

    दिल से आभार mparveen ji ………

sinsera के द्वारा
January 10, 2012

सुन्दर रचना, हर किसी के दर्द को उकेरती…सच है, दर्द ही वो मंच है जहां आ कर सब एक हो जाते हैं.तभी तो राजकमल जी हा हा हा हा न कर सके, (राजकमल जी से माफ़ी चाहती हूँ, सॉरी)…. साधना जी आप को भावाभिव्यक्ति की बधाई…

    sadhana thakur के द्वारा
    January 10, 2012

    sinsera ji,सबसे पहले आपकी पहली प्रतिक्रिया के लिए आभार आपका .आगे आपको रचना पसंद आई इसके लिए धन्यवाद् ………

Sumit के द्वारा
January 9, 2012

बहुत ही अच्छी कविता है …और ये चित्र भी http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/01/05/वो-पव्वा-चढ़ा-के-आई/

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    धन्यवाद् सुमित जी ,आपकी सराहना के लिए ………

Santosh Kumar के द्वारा
January 9, 2012

आदरणीय साधना बहन ,.सादर नमस्कार बहुत कारुणिक अभिव्यक्ति,.. जीवन को करीब से देखने का अनुभव नजर आता है …हार्दिक बधाई और शुभकामनाये

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    संतोष भाई ,नमस्कार ,बहुत-बहुत धन्यवाद् ,जिन्दगी तो एक पहेली है ,बस उसे ही जानने की एक कोशिश है ………

munish के द्वारा
January 9, 2012

साधना जी आपके उदगार अच्छे हैं……… जैसी सबने टिप्पड़ी दी की ” की जिदगी के फलसफे को बहुत अच्छे से लिखा है” वो तो है परन्तु मुझे लगता है कहीं कविता मैं कुछ और भी छिपा है. चाहे अल्पकालिक ही क्यों न हो………..??

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    मुनीश भाई ,सच कहा आपने ,आपने भाव में छिपे कसक को ……. आभार आपका प्रतिक्रिया और सहयोग के लिए ,धन्यवाद्………..

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
January 9, 2012

या रब भटकती रही तुझे पाने को दरबदर इधर उधर , भूख से बिलखती , उघडी जिस्म नज़र क्यूँ न आई ….. ज़िन्दगी तुझे जी क्यूँ न पाई ….????? आदरणीया साधना गुरु जी …अभिवादन ..सुन्दर कारुणिक रचना ..यही तो है जिन्दगी ..समझ नहीं आता ये रब क्यों ऐसी परीक्षा लेता है ..क्या अपराध किया था उन लोगों ने जो भूखे प्यासे बिन वस्त्र गुजर बसर करने को मजबूर है …छवि ने सब कह दिया सुन्दर रचना भ्रमर ५

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    भ्रमर भाई ,नमस्कार ,आभार आपका आपकी प्रतिक्रिया के लिए ,और रचना को सराहने के लिए …

allrounder के द्वारा
January 9, 2012

जिन्दगी के जुल्मो सितम झेलती जिंदगियों के दर्द को बेहतरीन तरीके से उभारती रचना पर हार्दिक बधाई आपको साधना जी !

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    धन्यवाद् allrounder जी ,आपकी प्रतिक्रिया के लिए और सराहना के लिए ……

sonam के द्वारा
January 9, 2012

या रब भटकती रही तुझे पाने को दरबदर इधर उधर , भूख से बिलखती , उघडी जिस्म नज़र क्यूँ न आई ….. ज़िन्दगी तुझे जी क्यूँ न पाई ….????? भावपूणॅ रचना।

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    सोनम जी ,रचना के भाव को सराहने के लिए धन्यवाद् आपका ,और आपकी पहली प्रतिक्रिया के लिए आभार ………

alkargupta1 के द्वारा
January 9, 2012

प्रिय साधना , ज़िन्दगी का अति सुन्दर चित्रण किया है बधाई ! शुभकामनाएं

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    भाभी जी ,प्रणाम .बहुत -बहुत धन्यवाद् आपका ,आपके सहयोग और आशीर्वाद के लिए ……….

dineshaastik के द्वारा
January 9, 2012

कविता के माध्यम से जिन्दगी के महत्वपूर्ण पहलू को सम्पूर्णतः से परिभाषित किया है आपने। कितनी जटिल और रहस्यपूर्ण है जिन्दगी……. सहज ढ़ग से उसे प्रस्तुत करना। विस्तृत कल्पना शक्ति ही ऐसा कर सकती है या कोई चमत्कारिक लेखनी……..

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    दिनेश भाई ,आपने तो मेरी लेखनी को बहुत ऊँचा उठा दिया ,जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है ,अभी तो बहुत कुछ सीखना बांकी है ,दिल से शुक्रिया आपका ……

akraktale के द्वारा
January 8, 2012

साधना जी सादर नमस्कार, बहुत ही अप्रतिम रचना ज़िन्दगी तुझे जी कहाँ पाई ….????? सच है किसी को कुछ देने का सुख जहां चैन कि नींद देता है वहीँ कुछ ना कर पाने का मलाल आँखों से नींदें ही उड़ा देता है. बधाई.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    akraktaleji ,आभार आपका आपकी प्रतिक्रिया के लिए ,और बेहद ख़ुशी हुई जानकार की आपको रचना पसंद आई ……….

Rajkamal Sharma के द्वारा
January 8, 2012

आदरणीय साधना बहिन जी ….. सादर अभिवादन ! जिंदगी के फलसफे और उसके प्रति आपके द्रष्टिकोण (जोकि हरेक का अलग -२ होता है ) को ब्यान करती हुई अति सुन्दर रचना मुबारकबाद

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    सम्मानीय राजकमल भाई ,दिल से आभार आपकी प्रतिक्रिया हेतु ,आप सब के विचार से बल मिलता है लेखनी को .धन्यवाद् ………..नमस्कार और नववर्ष की शुभकामनाये ………

krishnashri के द्वारा
January 8, 2012

महोदया, बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए बधाई .

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    सम्मानीय सर,बहुत -बहुत धन्यवाद् आपका की आपने रचना को सराहा ………

minujha के द्वारा
January 8, 2012

जीवन दर्शन को दर्शाती एक अतिसुंदर रचना आभार आपका इतनी अच्छी कविता के लिए

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    मीनू ,बेहद ख़ुशी हुई की तुम्हे कविता अच्छी लगी ,धन्यवाद् ,वैसे तुम खुद इतना अच्छा लिखती हो ….

nishamittal के द्वारा
January 8, 2012

वाह साधना जी बहुत सुन्दर रचना.बधाई

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    आदरणीय निशा जी ,तहेदिल से शुक्रिया आपका …….

Deepak Sahu के द्वारा
January 8, 2012

आदरणीय साधना जी! सुंदर पंक्तियाँ आपकी! बधाई

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    दीपक जी ,बहुत -बहुत धन्यवाद् आपकी प्रतिक्रिया के लिए ………

jlsingh के द्वारा
January 8, 2012

ज़िन्दगी तुझे ढूंढते ढूंढते थक सी गयी हूँ कहने को तो उम्र कटने को है आई , पर ज़िन्दगी तुझे जी कहाँ पाई ….??? ज़िन्दगी तुझे जी कहाँ पाई ….????? बहुत ही सुन्दर पक्तियां और सुन्दर भाव! साधना जी, नमस्कार! और बधाई!

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    jlsinghji , namaskar ,बेहद ख़ुशी हुई जानकर की रचना आपको पसंद आई ,आभार आपका …

sukanyathakur के द्वारा
January 7, 2012

bohot hi acha likha hai maa..!!! :)

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    thanks beta ,love u …..

manoranjanthakur के द्वारा
January 7, 2012

जिन्दगी की फलसफा को उकेर हर पंक्ति में अलग भाव उपजाने की सुंदर कोशिश बहुत बधाई

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    मनोरंजन भाई ,बेहद ख़ुशी हुई जानकार की आपको रचना के भाव अच्छे लगे ,धन्यवाद्……….

Amita Srivastava के द्वारा
January 7, 2012

साधना जी नये साल की एक दिल को छु लेने वाली प्रस्तुति ,जिन्दगी बीत जाती है और हम उसे समझते रह जातेहै . कभी अच्छी लगी वो इतनी कभी बुरी लगी हर रूप जिसका देखा थी मेरी जिन्दगी ||

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    अमिता जी ,तहे दिल से शुक्रिया ……..

January 7, 2012

आदरणीया साधना जी, बहुत संवेदनशील विषय का बहुत ही खूबसूरती से चित्रण !! शब्द नहीं है मेरे पास…..इससे अधिक और क्या कहूँ !! बहुत ही खूबसूरत !!! सादर आभार…..हार्दिक बधाई !! :)

    sadhana thakur के द्वारा
    January 9, 2012

    संदीप भाई ,बहुत -बहुत धन्यवाद् आपका ,की आपके विचार मिले ,आपको कविता पसंद आई ……..


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran