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वक़्त ही तो था ...

Posted On: 20 Jan, 2012 Others में

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वक़्त ही तो था
बीतना था बीत गया …
दे गया ज़ख्म कोई तो क्या
टूटना ही था, दिल टूट गया
दरका था कहीं कुछ
देखा सीने में दरार था ,
भरना ही था , वक़्त की रेत से भर गया
वक़्त ही तो था
बीतना था बीत गया …. .
वक़्त-वक़्त की बात है
तुम तन्हाई में तन्हा थे
मैं भीड़ में अकेली थी
फ़ासला बस इतना था
तुम इस किनारे , मैं उस किनारे खड़ी थी
दरम्या लहरें थी ,
जिसमें सब कुछ बह गया
वक़्त ही तो था,
बीतना था बीत गया …. .

  
बंद मुट्ठी में लम्हें टिका नहीं करते हैं
ज़िन्दगी आज है ,कल पे यकीन नहीं किया करते हैं
खुद के आंसू की फ़िक्र छोड़ो
चलो किसी मासूम के आँखों की नमीं पोछतें हैं
वक़्त का आना जाना तो लगा ही रहता है दोस्त
पल भर की ज़िन्दगी को यूँ ही बर्बाद नहीं किया करते हैं

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63 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rakesh के द्वारा
February 11, 2012

बहुत khoob farmaya hai khas कर ये लाइन बहुत पसंद आई “खुद के आंसू की फ़िक्र छोड़ो चलो किसी मासूम के आँखों की नमीं पोछतें हैं” sadar abhivadan.

    sadhana thakur के द्वारा
    February 12, 2012

    बहुत -बहुत धन्यवाद् राकेश जी …….

कुमार हर्ष के द्वारा
February 5, 2012

great ise bhi pade क्या भारत को फिर कभी अब्दुल कलम जेसा राष्ट्रपति मिलेगा? http://kumarharsh.jagranjunction.com/2012/02/05/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81/

div81 के द्वारा
February 3, 2012

बहुत खुबसूरत जज्बात से भरी कविता आप की बधाई साधना जी :)

    sadhana thakur के द्वारा
    February 3, 2012

    धन्यवाद् आपका रचना की सराहना के लिए ……….

roshni के द्वारा
February 1, 2012

साधना जी नमस्कार देरी से प्रतिक्रिया के लिए माफ़ी चाहती हूँ .. बहुत ही सुंदर जज्बात कहती कविता दे गया ज़ख्म कोई तो क्या टूटना ही था, दिल टूट गया दरका था कहीं कुछ देखा सीने में दरार था , भरना ही था , वक़्त की रेत से भर गया वक़्त ही तो था.. हरेक पंक्ति बहुत बढ़िया आभार

    sadhana thakur के द्वारा
    February 1, 2012

    रौशनी जी ,नमस्कार ,देर आये दुरुस्त आये ,,आपकी प्रतिक्रिया मिली यही काफी है ,मेरी नई रचना ,,लो अब बसंत आया है ,जरूर पढिये,,आभार आपका ,,,,,,,

D33P के द्वारा
January 29, 2012

बंद मुट्ठी में लम्हें टिका नहीं करते हैं वक़्त का आना जाना तो लगा ही रहता है दोस्त साधना जी आपकी ये कविता पढकर मन आनंदित हो गया ,बहुत खूबसूरत भाव है

    sadhana thakur के द्वारा
    January 29, 2012

    बहुत -बहुत आभार आपका ,आपकी प्रतिक्रिया के लिए …….

वाहिद काशीवासी के द्वारा
January 27, 2012

व्यक्तिगत कारणों से मंच पर आना संभव नहीं हो पा रहा था। आज आया हूँ तो सभी की रचनाएँ देख रहा हूँ। आपके दोनों ही काव्य बहुत अच्छे हैं। पहला जहाँ ढाढस बंधाता हुआ है वहीं दूसरे में आशावाद स्पष्ट झलक रहा है। बहुत ही उत्तम रचना,

    sadhana thakur के द्वारा
    January 27, 2012

    धन्यवाद् वाहिद भाई ……….

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
January 26, 2012

खुद के आंसू की फ़िक्र छोड़ो चलो किसी मासूम के आँखों की नमीं पोछतें हैं वक़्त का आना जाना तो लगा ही रहता है दोस्त पल भर की ज़िन्दगी को यूँ ही बर्बाद नहीं किया करते हैं.. बहुत सुन्दर जज्बात साधना जी काश ऐसा ही होता रहे …वक्त तो वक्त ही है कहाँ ठहरता है …यादें ले कर क्यों सिसकते रहना … जय श्री राधे भ्रमर 5

    sadhana thakur के द्वारा
    January 26, 2012

    भ्रमर भाई ,नमस्कार ,आपको रचना के भाव पसंद आये ये जान बेहद ख़ुशी हुई …….आभार आपका ..

suhana के द्वारा
January 26, 2012

एक बार फिर बहुत अच्छी रचना :)

    sadhana thakur के द्वारा
    January 26, 2012

    बहुत -बहुत धन्यवाद् आपका …….

January 25, 2012

बंद मुट्ठी में लम्हें टिका नहीं करते हैं !! बहुत ही खूबसूरत पंक्ति साधना जी !! अच्छा लगा पढ़कर !! :)

    sadhana thakur के द्वारा
    January 26, 2012

    धन्यवाद् संदीप जी ,ख़ुशी हुई जानकार की आपको कविता पसंद आई ,आपलोगों का सहयोग बना रहे ..

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
January 24, 2012

बहुत सुन्दर कविता.बधाई! साधना जी. बंद मुट्ठी में लम्हें टिका नहीं करते हैं ज़िन्दगी आज है ,कल पे यकीन नहीं किया करते हैं अति सुन्दर पंक्तियाँ.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 24, 2012

    राजीव जी ,नमस्कार ,बहुत-बहुत धन्यवाद्…..

dineshaastik के द्वारा
January 24, 2012

वक्त बीतने के लिये दिल टूटने के लिये होते हैं। भीड़ है  अकेले हैं क्या इसीलिये रोते हैं। रचना कर देती है भावावेश अंत में सुन्दर संदेश। कृपया इसे भी पढ़े– “क्या यही गणतंत्र है” http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/01/23/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%88/

    sadhana thakur के द्वारा
    January 24, 2012

    दिनेश जी ,नमस्कार ,आभार आपका ,आपकी प्रतिक्रिया के लिए ..

JAMALUDDIN ANSARI के द्वारा
January 23, 2012

साधना जी नमस्कार बहुत अच्छी कविता , आप ने तो गागर में सागर भर दिया है . आइये हम सब मिलकर समाज में एक नयी क्रांति की शुरुआत करे l

    sadhana thakur के द्वारा
    January 23, 2012

    अंसारी भाई साहेब ,पहली बार आपकी बहुत अच्छी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् …

jlsingh के द्वारा
January 21, 2012

तुम तन्हाई में तन्हा थे मैं भीड़ में अकेली थी साधना जी, नमस्कार! वाह! वाह! वाह! वाह! क्या बात कही है आपने! बधाई!

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    jlsing bhai, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार ,सहयोग बनाये रखें ..

sukanyathakur के द्वारा
January 21, 2012

very well written….!!! :) :) love you maa…!!

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    thanks beta ,love u to ……..

Lahar के द्वारा
January 21, 2012

प्रिय साधना जी सप्रेम नमस्कार वक्त सब गमो को भुला देता है | दिल टूटना ! भीड़ में तन्हा महसूस करना , यही तो जिंदगी है | एक बार फिर अच्छी रचना | धन्यवाद |

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    लहर जी ,एक बार फिर आपको भी सराहना के लिए दिल से आभार ……

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 21, 2012

आदरणीय साधना जी. सादर अभिवादन. चलो किसी मासूम के आँखों की नमीं पोछतें हैं, हम साथ हैं. वास्तव मैं. सुंदर रचना. बधाई.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी ,नमस्कार ,बहुत -बहुत आभार आपका प्रतिक्रिया के लिए ……..

vinitashukla के द्वारा
January 21, 2012

सुंदर और गहरी अभिव्यक्ति साधना जी. बधाई आपको.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    धन्यवाद् विनीता जी ,सहयोग और सराहना के लिए …………..

allrounder के द्वारा
January 21, 2012

नमस्कार साधना जी, बेहतरीन जज्बातों को कविता रूपी माला मैं सुन्दरता से पिरोने के लिए आपको हार्दिक बधाई !

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    सचिन जी,बेहतरीन प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार और नमस्कार ……….

sinsera के द्वारा
January 21, 2012

न अब वो यादों का बहता दरिया, न फुरसतों की उदास बरखा, यूँ ही ज़रा सी खलिश है बाकी, जो ज़ख्म गहरा था भर गया वो. बहुत अच्छी पोजिटिव सोच…

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    बहुत अच्छी सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद् ………..

Sumit के द्वारा
January 21, 2012
    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    बहुत -बहुत धन्यवाद् ,सुमित जी …..

Amita Srivastava के द्वारा
January 21, 2012

साधना जी सही कहा आपने घर से तो बहुत दूर है मंदिर का रास्ता आओ किसी रोते हुए चेहरे को ह्सांये |

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    अमिता जी ,नमस्कार ,बस एक प्रयास है ये ………..प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् ……

krishnashri के द्वारा
January 21, 2012

महोदया, बहुत सुन्दर ,जिंदगी का फलसफा सिखाती , सकारात्मक भावों से ओत -प्रोत कविता के लिए बधाई .

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    आदरणीय सर ,बहुत-बहुत आभार आपका रचना की सराहना के लिए ……

manoranjanthakur के द्वारा
January 21, 2012

वक़्त के हाथो कैद जिन्दगी को सुंदर पिरोया है आपने बधाई

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    धन्यवाद् मनोरंजन जी ,,आभार आपका ……..

mparveen के द्वारा
January 21, 2012

साधना जी बहुत सुंदर देती आपकी खूबसूरत रचना के लिए बधाई ….

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    mparveen ji ,आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद् …….

nishamittal के द्वारा
January 21, 2012

बंद मुट्ठी में लम्हें टिका नहीं करते हैं ज़िन्दगी आज है ,कल पे यकीन नहीं किया करते हैं खुद के आंसू की फ़िक्र छोड़ो चलो किसी मासूम के आँखों की नमीं पोछतें हैं वक़्त का आना जाना तो लगा ही रहता है दोस्त पल भर की ज़िन्दगी को यूँ ही बर्बाद नहीं किया करते हैं सुन्दर मर्मस्पर्शी पंक्तियाँ साधना जी,बधाई.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    आदरणीय निशा जी ,,बेहद ख़ुशी हुई की आपको कविता पसंद आई ……

Santosh Kumar के द्वारा
January 21, 2012

आदरणीय साधना बहन ,..बहुत सरल और गहरी अभिव्यक्ति,..बहुत badhaai

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    संतोष भाई ,नमस्कार ,और दिल से आभार रचना की सराहना के लिए ………

January 20, 2012

सच है…”वो पल न रहे, तो ये भी नहीं रहेंगे. “.. वक्त में ही ताकत है बड़े-बड़े घाव भरने की..! इस वक़्त में इस वक़्त का फ़ायदा उठाना जिसे आ गया, दुनिया में बस उसी एक को जीना फिर आ गया. .. बहुत-बहुत सुन्दर, हृदयस्पर्शी प्रस्तुति, सादर.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    धन्यवाद् टिम्सी जी ,सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए ..

alkargupta1 के द्वारा
January 20, 2012

प्रिय साधना , वक्त के आगे हर किसी को झुकना पड़ता है….वक्त ही हमें ज़ख्म देता है और वही हमारे जख्मों को भरता है…….वक्त की हर शै गुलाम…… अंतिम पंक्तियों में बहुत अच्छा सन्देश दिया है…..शुभकामनाएं

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    प्रणाम भाभी जी ,,आपको कविता पसंद आई यानि लिखना सार्थक रहा ,धन्यवाद् आपका …….

akraktale के द्वारा
January 20, 2012

साधना जी नमस्कार, वक़्त-वक़्त की बात है तुम तन्हाई में तन्हा थे मैं भीड़ में अकेली थी फ़ासला बस इतना था तुम इस किनारे , मैं उस किनारे खड़ी थी दरम्या लहरें थी , जिसमें सब कुछ बह गया वक़्त ही तो था, बीतना था बीत गया …. . बिलकुल यथार्थ को दर्शाती पंक्तियाँ और आगे की सुध लेने का सन्देश. अत्यंत सुन्दर रचना. बधाई.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    akraktale ji ,नमस्कार ,,बहुत -बहुत धन्यवाद् की आपको रचना पसंद आई ………….

Rajkamal Sharma के द्वारा
January 20, 2012

आदरणीय सुमन दुबे बहिन जी ……. सादर अभिवादन ! ऐसा लगता है की आपके घर के आस पास कोई भी मस्जिद नहीं है शायद …. इसीलिए आप किसी रोते हुए बच्चे को हँसाना चाह रही है ….. हा हा हा हा हा हा हा हा हा अति सुन्दर रचना पर मुबारकबाद

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    राजकमल भाई ,नमस्कार .आप मंच से दूर न रहा करे ,देखिये आप सबका नाम भी भूलने लगे आपने मुझे सुमन दुबे बना दिया ………..हा हा हा …..प्रतिक्रिया के लिए आभार आपका ……..

Rajesh Dubey के द्वारा
January 20, 2012

बंद मुट्ठी में लम्हें टिका नहीं करते हैं ज़िन्दगी आज है ,कल पे यकीन नहीं किया करते हैं जीवन के मूल-मंत्र से भरी इस कविता में कई पंक्तिया मंत्र की तरह है. “पल भर की ज़िन्दगी को यूँ ही बर्बाद नहीं किया करते हैं”. बहुत सुन्दर रचना बधाई.

    sadhana thakur के द्वारा
    January 22, 2012

    राजेश भाई ,आभार आपका ,प्रतिक्रिया के लिए ………..


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