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हो........सुर्ख लाल II

Posted On: 11 Feb, 2012 Others में

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“वेलेंटाइन डे”,,प्यार करने का एक खास दिन .फूल ,कार्ड्स ,महंगे गिफ्ट के आदान प्रदान का दिन ,,यानी प्यार इन सब का मोहताज़ …..तो क्या यही है आज के प्यार का चर्चित और विकसित रूप ..?या प्यार के और भी है कई अनोखे रूप जिसका सम्बन्ध आत्मा से है, वास्तविकता से है ..दिल की एक आवाज़ को एक छोटी सी कविता में पिरोने की कोशिश की है ,कृपया अवश्य पढ़े …

 

अलग-अलग दिशा के राही
मिले आके इक छोर … I
बंधकर परिणय-सूत्र में
चल पड़े नए पथ की ओर I
पल पल जोड़ते और बुनते
रिश्ते-नाते की हर डोर

चलते रहे यूँही पथ पर
बीते, कितनी शामें, कितने भोर … I
जीवन की आपा-धापी में,
लगी थी आगे बढ़ने की होड़,
बीता वक़्त न आता है, न आयेगा
मची थी कानो में यही शोर … I
तपते जीवन की दोपहरी में
आ गयी संध्या दबे पांव,
जैसे कोई चोर …. I

तब इक दिन प्रिय ने कहा
सुनो आज है दिन कुछ ख़ास
हर तरफ है प्यार का उल्लास
सब बैठे है देखो कितने पास-पास
क्या यही है प्यार की पारिभाष … ???

 

“प्रिय” मैं क्या जानूं दिवस औ मास
मन में बस यही अंतिम अभिलाष
बाबुल के घर से निकली थी डोली
माथे ओड़े चुनरिया लाल ….
जब तुझसे लूँ अंतिम विदा
हो रंग कफ़न का सुर्ख लाल
हो रंग कफ़न का सुर्ख लाल .. I

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60 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Kumar Gaurav के द्वारा
March 10, 2012

बहुत भावुक कर देने वाली रचना आपकी साधना जी. बहुत अच्छी लगी. नयी रचना के इंतजार में…

    sadhana thakur के द्वारा
    March 10, 2012

    गौरव जी ,आभार आपका ,है सच को पाना मेरी नई पढ़िए ………

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 1, 2012

“प्रिय” मैं क्या जानूं दिवस औ मास मन में बस यही अंतिम अभिलाष बाबुल के घर से निकली थी डोली माथे ओड़े चुनरिया लाल …. जब तुझसे लूँ अंतिम विदा हो रंग कफ़न का सुर्ख लाल हो रंग कफ़न का सुर्ख लाल .. आदरणीया साधना जी बहुत सुन्दर काश ऐसी अभिलाषा आज भी प्रेमी प्रेमिका रखें ये दिवस प्यार निछावर और समर्पण लिए हो तो ये तनाव , अलगाव,गृह क्लेश , तलाक क्यों हो … जय श्री राधे सब के मन में प्यार और प्रेम भरे ..तो आनंद और आये भ्रमर ५

    sadhana thakur के द्वारा
    March 1, 2012

    भमर भाई ,बहुत ख़ुशी होती है आप सबकी प्रतिक्रिया और सहयोग पाकर ,इसलिए हमेशा इन्तजार रहता है ,कवि और लेखक प्रशंसा के ही भूखे होतें हैं …….धन्यवाद् ……

vinitashukla के द्वारा
February 26, 2012

बहुत ही भावपूर्ण और मन को छू जाने वाली रचना. बधाई साधना जी.

    sadhana thakur के द्वारा
    February 26, 2012

    दिल से आभार आपका विनीता जी ……

yogi sarswat के द्वारा
February 24, 2012

साधना जी नमस्कार ! मुझे याद नहीं आ रहा आपने हाल फिलहाल कोई पोस्ट डाली हो ! कैसे बहुत व्यस्त हैं ? आप की पोस्ट का इंतज़ार तो रहता ही है ! मुझे ये पोस्ट नहीं दिखी क्षमा चाहता हूँ क्योंकि उस दरम्यान प्यार पर पोस्ट डालने वालों की भीड़ सी हो गई थी और उसमें आपकी ये बेहतर रचना आँखों से निकल गई क्षमा चाहता हूँ ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/14/

    sadhana thakur के द्वारा
    February 25, 2012

    योगी जी नमस्कार ,बहुत -बहुत धन्यवाद् आपका की आपने देर से ही सही मेरी रचना को पढ़ा और सराहा ………..

February 21, 2012

साधना जी नमस्कार ! मुझे पता नहीं ये कविता कैसे मेरी निगाहों से बच गयी थी….बहुत सुंदर कविता जीवन का यथार्थ बतलाती और प्यार की सही परिभाषा देती…..बहुत बहुत बधाई हो !!

sadhana thakur के द्वारा
February 20, 2012

तहेदिल से आपका आभार ……

D33P के द्वारा
February 20, 2012

साधना जी आपके हर शब्द में अनमोल रिश्ते के प्रति समर्पण भाव ,प्रेम से परिपूर्ण…बहुत खूबसूरत

    sadhana thakur के द्वारा
    February 21, 2012

    बहुत-बहुत धन्यवाद् कविता की सराहना के लिए ………….

drmalayjha के द्वारा
February 17, 2012

बहुत अच्छी कविता लिखी हो साधना.हर शब्द में तुम ही तुम नज़र आती हो.ऐसे ही लिखती रहो. ढेर सारी शुभकामनायें.

    sadhana thakur के द्वारा
    February 17, 2012

    थैंक्स भाई ………..

anamika के द्वारा
February 16, 2012

प्रेम रस से सराबोर आपकी ये कविता……भावपूर्ण

    sadhana thakur के द्वारा
    February 17, 2012

    धन्यवाद् अनामिका जी ,बहुत दिन बाद आपकी प्रतिक्रिया पाकर बेहद ख़ुशी हुई ……

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 16, 2012

अति सुंदर कविता साधना जी। प्रेम के वास्तविक स्वरूप का सुंदर वर्णन किया आपने।  साभार,

    sadhana thakur के द्वारा
    February 16, 2012

    वाहिद भाई ,दिल से आभार आपका की आपने मेरी कविता पढ़ी और आपको अच्छी लगी ,बहुत -बहुत धन्यवाद् ,अपना सहयोग बनाये रखें …….

nishamittal के द्वारा
February 16, 2012

साधना जी गत दिनों अन्यत्र व्यस्तता के कारण आपकी ये बहुत सुन्दर रचना मुझसे मिस हुई.भारतीय नारी के मनोभावों व संस्कारों को व्यक्त करती रचना मुझको बहुत भाई.बधाई आपको.

    sadhana thakur के द्वारा
    February 16, 2012

    आदरणीय निशा जी ,नमस्कार ,आप सब का सहयोग और आपके विचार बहुत मायने रखता है ,दिल से शुक्रिया प्रतिक्रिया के लिए ,बेहद ख़ुशी हुई जान कर की कविता आपको पसंद आई …..

sinsera के द्वारा
February 14, 2012

बहुत ही सुन्दर कविता साधना जी, इस का मर्म एक भारतीय नारी ही समझ सकती है..आप ने हर स्त्री के मन की छुपी हुई चाह को बहुत ही सुन्दर शब्द दिए हैं,,,बधाई……

    sadhana thakur के द्वारा
    February 15, 2012

    धन्यवाद् सरिता जी ,बेहद ख़ुशी हुई ये जान कर की कविता का मर्म आपके मन को भाया ………

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
February 14, 2012

दिल को छूती कविता.बहुत सुन्दर रचना है.बधाईयाँ!! साधना जी.

    sadhana thakur के द्वारा
    February 14, 2012

    आभार आपका राजीव जी ,रचना को सराहने के लिए ……

Rajesh Dubey के द्वारा
February 14, 2012

अंतिम पंक्तियों में तो आपने जीवन का सार भर दिया है. बहुत मार्मिक, बहुत सुन्दर, दिल को छूती रचना के लिए वधाई.

    sadhana thakur के द्वारा
    February 14, 2012

    राजेश भाई ,बहुत -बहुत धन्यवाद आपका ……..

sukanyathakur के द्वारा
February 13, 2012

mummaa…fantastic..!!! :) :)

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    love u beta ………..

mparveen के द्वारा
February 13, 2012

प्रेम का सही स्वरूप देती आपकी भुक कर देने वाली कविता …. सही मायने में प्यार यही होता है ….

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    परवीन जी ,दिल से आभार आपका ………..

munish के द्वारा
February 13, 2012

बहुत खूब साधना जी, वास्तव में प्रेम प्रदर्शन की वास्तु नहीं यह तो एक अहसास है……… http://munish.jagranjunction.com/2011/02/14/%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%B2%E0%A5%87/

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    नमस्कार मुनीश भाई ..बहुत -बहुत धन्यवाद् आपका प्रतिक्रिया के लिए …………..

dineshaastik के द्वारा
February 13, 2012

आदरणीया साधना जी, हृदय को स्पर्श करने वाली, एक निष्ठ प्रेम का अहसास कराने वाली तथा ईश्वरीय प्रेम की  अनुभूति कराने वाली रचना निश्चित ही सराहना की पात्र है। http://dineshaastik.jagranjunction.com/बहस

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    दिनेश जी ,आभार रचना की सराहना के लिए …….

alkargupta1 के द्वारा
February 13, 2012

प्रिय साधना , तुम्हारी यह भावप्रधान कविता पढ़ कर उसी में खो गयी एक भारतीय सुसंस्कृत नारी की एकनिष्ठ प्रेम से भरपूर विवाहसे लेकर मृत्यु पर्यन्त अति भावपूर्ण चित्र खींचा है……..लिखती रहो……. हार्दिक शुभकामनाएं

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    प्रणाम भाभी जी ,आपका आशीर्वाद बना रहे ………..

shashibhushan1959 के द्वारा
February 12, 2012

आदरणीय साधना जी, सादर ! एक कर्तव्यनिष्ठ प्रेम की सर्वोत्तम झांकी…………….. ! भारतीय प्रेम-अवधारणा का स्वर्णिम रूप…………… ! संतुलित एवं मर्यादित प्रेम के रूप का दर्शन…………. ! ……………………………. अब शब्द नहीं मिल रहे हैं ! . सादर !!

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    शशिभूषण जी ,नमस्कार .इतनी अच्छी प्रशंशा के लिए दिल से आभार आपका ……..

suhana के द्वारा
February 12, 2012

रुला देने वाली रचना साधना जी ….

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    रोइए नहीं सुहाना जी ,बस तारीफ़ कीजिये .धन्यवाद् ………

Santosh Kumar के द्वारा
February 12, 2012

आदरणीय साधना बहन ,…वेलेंटाइन के दीवानों को भारतीय प्रेम का सुन्दर पाठ ,.हार्दिक बधाई

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    संतोष भाई ,आपका हार्दिक आभार रचना की सराहना के लिए …….

abhishektripathi के द्वारा
February 12, 2012

सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके समर्थन की जरुरत है!

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    जरूर ,पढूंगी अभिषेक जी ……

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 12, 2012

आदरणीया साधना जी, सादर अभिवादन अतिसुन्दर भाव एवं रचना, क्या रुलाना जरूरी है.

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    सर ,नमस्कार ,बेहद ख़ुशी हुई की आपको रचना पसंद आई ……….

krishnashri के द्वारा
February 12, 2012

महोदया , बहुत सुन्दर सोच और भावपूर्ण कविता . ऐसा केवल भारतीय नारी ही सोच सकती है , सफल प्रस्तुति के लिए बधाई .

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    सर ,नमस्कार ,आभार आपका प्रतिक्रिया और सराहना के लिए ……..

jlsingh के द्वारा
February 12, 2012

साधना जी, नमस्कार! एक भारतीय संस्कारी नारी न जाने वेलेंटाइन का मतलब बेचारी. वह तो जानती है पूर्ण समर्पण! अपने प्रिय के ह्रदय में करती स्पंदन! आपने अत्यंत ही मार्मिक पक्तियां लिखी है …… आपको नमन!

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    जवाहर भाई ,नमस्कार ,ख़ुशी हुई जानकार की रचना आपको पसंद आई …

akraktale के द्वारा
February 11, 2012

साधना जी सादर नमस्कार, एक सुन्दर रचना से आपने अटूट प्यार के दर्शन कराएं है बधाई. दूर देश से आयी गौरी,लाल चुनरिया ओढ़े, दूर देश फिर चली गयी लाल चुनरिया ओढ़े, छोड़ गयी कई,अनगिनत कोमल से अहसास, होता हर पल अबभी उसके प्यार का आभास, कह न सका जीवन भर मै हो ना कहीं उदास, दूर भले तन हो जाएँ मन रहेंगे पास ही पास.

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    अशोक जी ,बहुत -बहुत धन्यवाद् आपका ………….

Rajkamal Sharma के द्वारा
February 11, 2012

आदरणीय साधना बहिन जी …. सादर अभिवादन ! आजकल आप उम्मीद से ज्यादा देने लग गई है मैं उम्मीद करता हूँ की एक ना एक दिन तो हमको उम्मीद से दोगुणा मिलने लग ही जाएगा ….. हा हा हा हा हा हा हा हा ना करो मरने की बाते दिल हमारा लरजता है यूँ ही स्नेह से सरोबार होते रहे हम जोकि आपकी रचनाओं से बरसता है

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    नमस्कार राजकमल भाई ,बस आप लोंगो का सहयोग और आशीर्वाद है .धन्यवाद् ……..

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 11, 2012

साधना जी, सादर प्रणाम प्रेम की वास्तविक परिभाषा तो आपने दरसा दिया लोग प्रेम को आज सिर्फ इन्तार्तेंमेंट का जरिया समझ बैठें है और अपने आप को प्रेमी साबित करने में लगे है आज हमारी उम्र के लड़कों से प्रेम के बाड़े में पूछिए तो वो कहेंगे की हम तो प्रेम में पागल हुए बैठें है और दो दिन बाद वोही कह्नेगे की ये लड़की या लड़का ठीक नहीं था ….. आपकी अंतिम पन्तिया काफी दिल को छु गयीं अनुभवी और मार्मिक प्रेम कविता को मेरा सलाम

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    आनंद जी .बहुत -बहुत धन्यवाद्……

chaatak के द्वारा
February 11, 2012

स्नेही साधना जी, सादर अभिवादन, परिणय सूत्र के बंधने से लेकर सार्थक मृत्यु की इच्छा तक चल रही निरंतर प्रेम की धारा को बहते देखना अच्छा लगा| सराहनीय प्रयास, उत्तम अभिव्यक्ति, बधाई हो !

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    चातक भाई ,बहुत दिन बाद आपकी प्रतिक्रिया मिली ,बहुत अच्छा लगा .रचना की सराहना के लिए धन्यवाद् ..

minujha के द्वारा
February 11, 2012

एक ही पंक्ति कहना चाहुंगी-प्रेम का वो पक्का रंग जिसके आगे हर रंग फीका पङ जाए,अति सुंदर रचना

    sadhana thakur के द्वारा
    February 13, 2012

    मीनू ,धन्यवाद् ,हाँ ये रंग सबसे पक्का तो है ……….


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